- Post by Admin on Friday, Aug 14, 2026
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रायपुर। आज जब पूरा देश आजादी के 80 वर्ष के जश्न में डूबा है, राजनांदगांव की गलियों में एक अलग ही सुर गूंज उठता है, बेंजो के तारों से निकलती वह धुन, जिसमें छत्तीसगढ़ की माटी की सोंधी खुशबू घुली है। मंच पर जब गोविंद साव अपनी उंगलियां बेंजो पर दौड़ाते हैं, तो सामने बैठे श्रोता मंत्रमुग्ध होकर झूम उठते हैं। बरसों की तपस्या से तराशी गई यह कला, मानो हर धुन के साथ छत्तीसगढ़ की लोक-संस्कृति की कहानी सुना रही हो।
खुमान साव संगीत अकादमी (राष्ट्रपति पुरस्कृत ) के संस्थापक लोक कलाकार गोविंद साव पिछले कई वर्षों से इस सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और आगे बढ़ाने में जुटे हैं। उन्होंने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा कड़ी साधना और अनुशासन में समर्पित किया, ताकि छत्तीसगढ़ की लोक संगीत परंपरा नई पीढ़ी तक पहुंच सके।
बेंजो वादन में साव जी की महारत उन्हें अन्य कलाकारों से अलग पहचान देती है। यह वाद्ययंत्र जितना बजाने में कठिन माना जाता है, उतनी ही सहजता से साव जी इसे साधते हैं, और यही उनकी वर्षों की साधना का प्रमाण है।
खुमान साव संगीत अकादमी के माध्यम से गोविंद साव न केवल स्वयं प्रस्तुति देते हैं, बल्कि नई पीढ़ी के कलाकारों को भी प्रशिक्षित कर इस परंपरा को जीवित रखने का प्रयास कर रहे हैं। यह अकादमी छत्तीसगढ़ की लोक कला को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कड़ी बनकर उभरी है।
आजादी के 80वें वर्ष के इस अवसर पर गोविंद साव जैसे लोक कलाकारों का योगदान याद दिलाता है कि देश की असली पहचान केवल बड़े मंचों पर नहीं, बल्कि इन मिट्टी से जुड़े साधकों की अनथक साधना में भी बसती है, जिन्होंने अपनी कला के जरिए छत्तीसगढ़ का मान पूरे देश में ऊंचा किया है।
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