- Post by Admin on Monday, Jun 08, 2026
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गोपी : विश्व पर्यावरण दिवस प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारियों का स्मरण कराने वाला अवसर है। पर्यावरण संरक्षण, जलवायु संतुलन और सामाजिक जागरूकता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से बिलासपुर में आयोजित राज्य स्तरीय सम्मान समारोह प्रेरणा, संस्कृति और सामाजिक सरोकारों का अद्भुत संगम बन गया। इस अवसर पर समाज, साहित्य, कला और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तित्वों का सम्मान कर उनके कार्यों को नई पहचान दी गई।
पर्यावरण एवं पर्यटन विकास समिति, छत्तीसगढ़ी राजभाषा परिषद, वन विभाग एवं छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा सरस्वती शिशु मंदिर सभागार, तिलक नगर, बिलासपुर में विविध जनजागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पर्यावरण विषयक चित्रकला एवं पेंटिंग प्रतियोगिता, छत्तीसगढ़ी गीतों की संगीतमय प्रस्तुति, व्यंजन मेला, साहित्यिक प्रदर्शनी तथा सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया।
शताधिक बच्चों ने चित्रकला प्रतियोगिता में भाग लेकर जल संरक्षण, वन्यजीवन संरक्षण और प्लास्टिक प्रदूषण जैसे विषयों पर अपनी रचनात्मक अभिव्यक्ति प्रस्तुत की। मुख्य अतिथि डॉ. अभिलाषा बेहार, सचिव छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग ने अपने उद्बोधन में कहा कि पर्यावरण प्रदूषण आज की सबसे गंभीर चुनौतियों में से एक है और इसका समाधान सामूहिक सहभागिता से ही संभव है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. विनय कुमार पाठक ने समिति द्वारा तीन दशकों से किए जा रहे पर्यावरण जागरूकता प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि जल, वायु और सामाजिक प्रदूषण के बढ़ते संकट के बीच पर्यावरण संरक्षण ही जीवन संरक्षण का आधार है। कार्यक्रम में उपस्थित अन्य अतिथियों ने भी पर्यावरणीय संतुलन और जनभागीदारी के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए।
सायंकाल आयोजित राज्य स्तरीय सम्मान समारोह में समाज, साहित्य, कला, पत्रकारिता, पुरातत्व संरक्षण, रंगमंच, सिनेमा और समाजसेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले अनेक विशिष्ट व्यक्तित्वों एवं संस्थाओं को सम्मानित किया गया।
इसी क्रम में वरिष्ठ साहित्यकार एवं संस्कृतिकर्मी डॉ. दीनदयाल साहू तथा डॉ. डी.पी. देशमुख को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया। समारोह में प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार तथा सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। पर्यावरण प्रेमियों, साहित्यकारों, कलाकारों, विद्यार्थियों और नागरिकों की उल्लेखनीय उपस्थिति ने आयोजन को सफल एवं यादगार बना दिया।
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