गोपी : विश्व पर्यावरण दिवस प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारियों का स्मरण कराने वाला अवसर है। पर्यावरण संरक्षण, जलवायु संतुलन और सामाजिक जागरूकता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से बिलासपुर में आयोजित राज्य स्तरीय सम्मान समारोह प्रेरणा, संस्कृति और सामाजिक सरोकारों का अद्भुत संगम बन गया। इस अवसर पर समाज, साहित्य, कला और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तित्वों का सम्मान कर उनके कार्यों को नई पहचान दी गई।

पर्यावरण एवं पर्यटन विकास समिति, छत्तीसगढ़ी राजभाषा परिषद, वन विभाग एवं छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा सरस्वती शिशु मंदिर सभागार, तिलक नगर, बिलासपुर में विविध जनजागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पर्यावरण विषयक चित्रकला एवं पेंटिंग प्रतियोगिता, छत्तीसगढ़ी गीतों की संगीतमय प्रस्तुति, व्यंजन मेला, साहित्यिक प्रदर्शनी तथा सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया।

शताधिक बच्चों ने चित्रकला प्रतियोगिता में भाग लेकर जल संरक्षण, वन्यजीवन संरक्षण और प्लास्टिक प्रदूषण जैसे विषयों पर अपनी रचनात्मक अभिव्यक्ति प्रस्तुत की। मुख्य अतिथि डॉ. अभिलाषा बेहार, सचिव छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग ने अपने उद्बोधन में कहा कि पर्यावरण प्रदूषण आज की सबसे गंभीर चुनौतियों में से एक है और इसका समाधान सामूहिक सहभागिता से ही संभव है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. विनय कुमार पाठक ने समिति द्वारा तीन दशकों से किए जा रहे पर्यावरण जागरूकता प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि जल, वायु और सामाजिक प्रदूषण के बढ़ते संकट के बीच पर्यावरण संरक्षण ही जीवन संरक्षण का आधार है। कार्यक्रम में उपस्थित अन्य अतिथियों ने भी पर्यावरणीय संतुलन और जनभागीदारी के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए।

सायंकाल आयोजित राज्य स्तरीय सम्मान समारोह में समाज, साहित्य, कला, पत्रकारिता, पुरातत्व संरक्षण, रंगमंच, सिनेमा और समाजसेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले अनेक विशिष्ट व्यक्तित्वों एवं संस्थाओं को सम्मानित किया गया।

इसी क्रम में वरिष्ठ साहित्यकार एवं संस्कृतिकर्मी डॉ. दीनदयाल साहू तथा डॉ. डी.पी. देशमुख को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया। समारोह में प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार तथा सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। पर्यावरण प्रेमियों, साहित्यकारों, कलाकारों, विद्यार्थियों और नागरिकों की उल्लेखनीय उपस्थिति ने आयोजन को सफल एवं यादगार बना दिया।

Share

अन्य समाचार

img-20260818-wa0047

हे मानव मुझे मत मार...

हे मानव तू अपना भूख शांत कर पर मुझे जान से मत मार ! मुझे भी दर्द होता है मुझमें भी जान बसती है ...


Read More...
img-20260812-180325

सावन का महीना...कोई प्रियजन दूर हो तो उसकी याद और गहरी हो जाती है, और जो पास हों उनके साथ का हर पल और अनमोल लगने लगता है

गांव की गलियों में बच्चे भीगते हुए दौड़ लगाते हैं, कागज की नावें बनाकर नालियों में तैराते हैं। पेड़ों की डालियों पर झूले पड़ जाते हैं और युवतियां "सावन के झूले" गाते हुए झूला झूलती हैं।


Read More...
img-20260812-wa0024

बेंजो के तारों से छत्तीसगढ़ी माटी की महक बिखेरने वाले साधक गोविंद साव

खुमान साव संगीत अकादमी (राष्ट्रपति पुरस्कृत ) के संस्थापक लोक कलाकार गोविंद साव पिछले कई वर्षों से इस सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और आगे बढ़ाने में जुटे हैं। उन्होंने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा कड़ी साधना और अनुशासन में समर्पित किया, ताकि छत्तीसगढ़ की लोक संगीत परंपरा नई पीढ़ी तक पहुंच सके।


Read More...
5a41aa1a-baf2-4369-b0a7-70a60eab0a55

छत्तीसगढ़ी लोकजीवन के रंग समेटे हैं चंपेश्वर गोस्वामी के गीत

जन्म से मृत्यु तक मानव जीवन के हर पड़ाव पर गीत साथ चलते हैं लोरी से लेकर विवाह के मंगलगीत तक। छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध गीतकार चंपेश्वर गोस्वामी के गीतों में इसी लोकजीवन की विविधता और गहराई देखने को मिलती है।


Read More...
img-20260726-wa0022

ग्रामीण संस्कृति पर संदर्भित चार पुस्तकों का विमोचन

इन पुस्तकों में ग्रामीण पृष्ठभूमि पर केंद्रित छत्तीसगढ़ी उपन्यास "बड़े दाऊजी"लेखक डॉ.डी.पी.देशमुख,"सोनहा माटी"डॉ.दीनदयाल साहू कृत एवं डॉ.गिरधर चंद्रा द्वारा लिखित दो हिंदी काव्य संग्रह "अंतर्मन का शब्द"व " भावों की अभिव्यक्ति" शामिल है।


Read More...
9d4cc6a0-bb3b-4b4e-86bd-d97cd7687c18

वो सुकून भरी रोशनियाँ अब कहाँ हैं…

क्योंकि सच तो यही है इस चमकती दुनिया में सब कुछ रोशन होकर भी बहुत कुछ अंधेरे में खो गया है…।


Read More...
img-20260511-wa0034

जब संवेदनाएं बनीं उपन्यास...‘पीरा’ के जरिए जनभावनाओं को आवाज़ देने वाला साहित्यिक सफर...साहित्य साधना से समाज को दिशा दे रहे हैं डॉ. दीनदयाल साहू

रायपुर के न्यू सर्किट हाउस सभागार में छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग द्वारा आयोजित एक दिवसीय साहित्यिक समारोह में डॉ. दीनदयाल साहू की बहुचर्चित छत्तीसगढ़ी उपन्यास ‘पीरा’ का भव्य विमोचन हुआ


Read More...
99a347d7-1a59-4733-b671-3885b41d248c

जब किसी बच्चे ने पहली बार “मां” कहा…

रजनी राठी का मानना है कि हर बच्चे के भीतर एक अनोखी प्रतिभा छिपी होती है, बस उसे सही दिशा और संवेदनशील सहयोग की जरूरत होती है। वे आधुनिक तकनीकों और विशेष प्रशिक्षण के माध्यम से बच्चों के संचार कौशल को विकसित करने में लगातार कार्य कर रही हैं। उनका यह समर्पण केवल पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति सेवा का जीवंत उदाहरण बन चुका है।


Read More...
img-20260504-072916

संस्मरण....मिट्टी का घर, खपरैल की छत तले बसी ठंडी दुनिया

आज जब कंक्रीट के जंगलों में हम एसी और कूलर के बीच भी चैन नहीं ढूंढ पाते, तब मिट्टी-खपरैल के वे घर याद आते हैं। वे घर, जो सिर्फ रहने की जगह नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ तालमेल का सबसे खूबसूरत उदाहरण थे। शायद यही वजह है कि उन घरों की यादें आज भी दिल के किसी कोने में ठंडी छांव बनकर जिंदा हैं जहां लौटने का मन बार-बार करता है।


Read More...