- Post by Admin on Tuesday, Jun 09, 2026
- 272 Viewed
![]()
कमलेश यादव : राष्ट्रपति भवन का भव्य दरबार सोमवार को उस समय गर्व की भावना से भर उठा, जब देश के बहादुर वीरों को शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया। इस सम्मान समारोह में जब छत्तीसगढ़ पुलिस के निरीक्षक लक्ष्मण केवट और निरीक्षक रामेश्वर प्रसाद देशमुख का नाम पुकारा गया, तब केवल दो अफसर सम्मानित नहीं हो रहे थे, बल्कि उनके साथ उन सैकड़ों जवानों का साहस, समर्पण और संघर्ष भी सम्मान पा रहा था, जिन्होंने देश की सुरक्षा के लिए अपने जीवन को दांव पर लगाया।
आज हर कोई जानना चाहता है कि आखिर इन दो अधिकारियों ने ऐसा क्या किया, जिसने उन्हें देश के सर्वोच्च वीरता सम्मानों में शामिल कर दिया। इसकी कहानी हमें राष्ट्रपति भवन की चमक-दमक से दूर, बस्तर और कांकेर के घने जंगलों तक ले जाती है, जहां हर कदम पर खतरा था और हर सांस के साथ मौत मंडरा रही थी।
16 अप्रैल 2024 की सुबह सुरक्षा बलों की एक बड़ी टीम कांकेर जिले के छोटे बेठिया क्षेत्र के हापाटोला जंगल में अभियान पर निकली थी। सब कुछ सामान्य दिख रहा था, लेकिन अचानक नक्सलियों ने घात लगाकर हमला बोल दिया। गोलियों की आवाज से पूरा जंगल गूंज उठा। यह वह क्षण था, जहां एक छोटी सी चूक सैकड़ों परिवारों को जीवनभर का दर्द दे सकती थी।
ऐसे कठिन समय में निरीक्षक लक्ष्मण केवट और निरीक्षक रामेश्वर देशमुख ने अद्भुत धैर्य और नेतृत्व का परिचय दिया। उन्होंने घबराने के बजाय तत्काल रणनीति बदली और जवानों को संगठित करते हुए मोर्चा संभाल लिया। तीन घंटे से अधिक समय तक चली भीषण मुठभेड़ में दोनों अधिकारी लगातार अग्रिम पंक्ति में डटे रहे। उनकी सूझबूझ और साहस का परिणाम यह रहा कि लगभग 200 जवान सुरक्षित बच निकले। इस अभियान में चार जवान घायल हुए, लेकिन उन्हें भी सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
वहीं दूसरी ओर नक्सलियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। मुठभेड़ समाप्त होने के बाद जो तस्वीर सामने आई, उसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। सुरक्षा बलों ने 15 महिला नक्सलियों सहित कुल 29 नक्सलियों को मार गिराया था। इसे छत्तीसगढ़ के इतिहास के सबसे सफल एंटी-नक्सल अभियानों में से एक माना गया।
दरअसल, यह पहली बार नहीं था जब इन दोनों अधिकारियों ने असाधारण साहस दिखाया हो। पुलिस महकमे में लक्ष्मण केवट और रामेश्वर देशमुख की पहचान नक्सल ऑपरेशन विशेषज्ञों के रूप में है।
बताया जाता है कि लक्ष्मण केवट अब तक 97 नक्सलियों के विरुद्ध हुई सफल कार्रवाइयों का हिस्सा रह चुके हैं, जबकि रामेश्वर देशमुख ने 56 से अधिक अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वर्षों का अनुभव और जोखिम भरे अभियानों में अर्जित आत्मविश्वास इस सफलता की मजबूत नींव बना।
इनकी वीरता का सम्मान पहले भी कई बार हो चुका है। लक्ष्मण केवट को राष्ट्रपति पुलिस पदक सहित अनेक वीरता सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। वहीं रामेश्वर देशमुख को भी उनकी उत्कृष्ट सेवाओं और बहादुरी के लिए कई बार सम्मानित किया गया है। लेकिन शौर्य चक्र का सम्मान उनके करियर में एक ऐसी उपलब्धि है, जो आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करेगी।
राष्ट्रपति भवन में मिला यह शौर्य चक्र केवल दो अफसरों की बहादुरी का सम्मान नहीं है। यह उन अनगिनत जवानों के त्याग, साहस और समर्पण को नमन है, जो हर दिन देश की सुरक्षा के लिए अपने परिवारों से दूर रहकर चुनौतियों का सामना करते हैं। छत्तीसगढ़ के इन दो जांबाज बेटों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि जब हौसले बुलंद हों, तो सबसे कठिन जंगलों में भी जीत का रास्ता बनाया जा सकता है।
अन्य समाचार
युवाओं के लिए तकनीकी शिक्षा का अवसर, शासकीय पॉलिटेक्निक राजनांदगांव में प्रवेश प्रक्रिया 11 से 15 जून तक
विदित हो कि संस्था में मॉडर्न ऑफिस मैनेजमेंट, कॉस्ट्यूम डिजाइनिंग एंट्रेंस मेकिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं टेलीकम्युनिकेशन, कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग एवं इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी जैसी रोजगार उन्मुख तीन वर्षीय डिप्लोमा पाठ्यक्रम संचालित है ।
Read More...
सीएम हेल्पलाइन 1076 का शुभारंभ : 42 विभागों के 8 हजार अधिकारी 1195 श्रेणियों में शिकायतों का करेंगे समयबद्ध निराकरण
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार का स्पष्ट संकल्प है कि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक की समस्या सुनी जाए, उसका समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए तथा शासन-प्रशासन को और अधिक जवाबदेह बनाया जाए।
Read More...
पर्यावरण संरक्षण के लिए जन्मदिन पर जंगल में 250 देसी आम के बीज फेंके
जंगल में प्राकृतिक फल वाले पेड़ कम होते जा रहे हैं। ऐसे में गुठली रोपण से 5-7 साल में फलदार वृक्षों से भर जाएगा। इससे पशु -पक्षियों को भोजन के लिए गांवों की ओर नहीं भटकना पड़ेगा।
Read More...
दृढ़ इच्छाशक्ति और समाजसेवा का भाव किसी भी महिला को नेतृत्व की ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है...श्रीमती हेमा देशमुख की प्रेरक यात्रा
आज लगभग 25 वर्षों से राजनीति में सक्रिय रहते हुए श्रीमती हेमा देशमुख वर्तमान में महिला कांग्रेस छत्तीसगढ़ की प्रदेश उपाध्यक्ष के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रही हैं।
Read More...
दूरदर्शन केंद्र में हुए संवाद कार्यक्रम...मुख्यमंत्री ने की ड्रोन दीदी शांति विश्वकर्मा की सराहना
कार्यक्रम में ड्रोन दीदियों की उपलब्धियों ने यह संदेश दिया कि अवसर और संकल्प मिलने पर ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं भी नवाचार और नेतृत्व के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू सकती हैं।
Read More...
पद्म पुरस्कार की राह पर जनजातीय प्रतिभाएं: सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 5 जून तक आमंत्रित किए जा रहे नामांकन
सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में जनजातीय समुदाय के उन योग्य और प्रेरणादायक व्यक्तियों की पहचान एवं नामांकन की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है, जो पद्म पुरस्कारों के लिए पात्र हैं।
Read More...
विशेष शिक्षा के क्षेत्र में सुनहरा अवसर: समेकित क्षेत्रीय केंद्र (सी.आर.सी) ठाकुरटोला में प्रवेश प्रारंभ
समेकित क्षेत्रीय केंद्र ठाकुरटोला, राजनांदगांव में पुनर्वास परिषद इंडिया (आर.सी.आई.), नई दिल्ली से मान्यता प्राप्त दो वर्षीय पूर्णकालिक डिप्लोमा इन एजुकेशन स्पेशल एजुकेशन (आई.डी.डी.) पाठ्यक्रम संचालित किया जा रहा है। यह पाठ्यक्रम बौद्धिक एवं विकासात्मक विकलांगता के क्षेत्र में विशेषज्ञता प्रदान करता है तथा विद्यार्थियों को व्यावसायिक रूप से सशक्त बनाता है।
Read More...
विशेष बच्चों के लिए धमतरी में लगा स्पीच एवं स्पेशल एजुकेशन वर्कशॉप
वर्कशॉप में राजनांदगांव की प्रसिद्ध स्पीच थैरेपी विशेषज्ञ रजनी राठी ने अपनी महत्वपूर्ण सेवाएं प्रदान कीं। उन्होंने बच्चों की समस्याओं का परीक्षण कर अभिभावकों को आवश्यक परामर्श दिया। साथ ही बच्चों के व्यवहार, भाषा विकास और संचार क्षमता को बेहतर बनाने के लिए कई उपयोगी सुझाव भी साझा किए।
Read More...
‘प्लास्टिक के जाल’ में कैद होती ग्रामीण संस्कृति, कला ने बयां किया दर्द
इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय के राजमहल परिसर के सामने जब लोगों की नजर बांस से बनी एक झोपड़ी पर पड़ी, जो काली पन्नियों और प्लास्टिक में जकड़ी हुई थी, तो हर कोई कुछ पल के लिए ठहर गया। यह सिर्फ एक कला प्रदर्शनी नहीं थी, बल्कि ग्रामीण संस्कृति की पीड़ा, संघर्ष और उम्मीद का जीवंत चित्रण था।
Read More...
मदर्स डे विशेष : घर, बच्चे और करियर… ममता और मेहनत की मिसाल रश्मि हरिहारनो का प्रेरक सफर
मदर्स डे के इस विशेष अवसर पर शहर की प्रसिद्ध ब्यूटीशियन रश्मि हरिहारनो की कहानी हर उस महिला को प्रेरणा देती है, जो परिवार और अपने सपनों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है। रश्मि ने यह साबित किया है कि यदि इरादे मजबूत हों तो एक महिला घर की जिम्मेदारियों को निभाते हुए भी सफलता की नई ऊँचाइयों को छू सकती है।
Read More...