कमलेश यादव : माँ… केवल एक शब्द नहीं, बल्कि वह एहसास है जो टूटते मन को सहारा देता है, अंधेरे में रोशनी बनता है और हर परिस्थिति में अपने बच्चों के लिए ढाल बनकर खड़ा रहता है। जीवन की भागदौड़ में भले ही लोग व्यस्त हो जाएं, लेकिन माँ का चेहरा, उसकी ममता और उसका त्याग कभी धुंधला नहीं पड़ता। मदर्स डे मानो फिर से उसी वात्सल्य की गोद में ले जाकर खड़ा कर देता है, जहाँ निस्वार्थ प्रेम बसता है। एक माँ अपने सपनों को पीछे रखकर बच्चों के भविष्य को संवारती है, और यही त्याग उसे संसार का सबसे सुंदर रूप बनाता है।

मदर्स डे के इस विशेष अवसर पर शहर की प्रसिद्ध ब्यूटीशियन रश्मि हरिहारनो की कहानी हर उस महिला को प्रेरणा देती है, जो परिवार और अपने सपनों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है। रश्मि ने यह साबित किया है कि यदि इरादे मजबूत हों तो एक महिला घर की जिम्मेदारियों को निभाते हुए भी सफलता की नई ऊँचाइयों को छू सकती है।

एक कुशल गृहिणी के रूप में उन्होंने अपने परिवार को हमेशा प्राथमिकता दी। घर की छोटी-बड़ी जिम्मेदारियाँ हों या बच्चों की परवरिश, उन्होंने हर भूमिका को पूरी संवेदनशीलता और समर्पण के साथ निभाया। लेकिन इसके साथ ही उन्होंने अपने हुनर को भी पहचान दी और ब्यूटी इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बनाई। आज शहर में उनका नाम सम्मान के साथ लिया जाता है।

रश्मि हरिहारनो कहती हैं, “मेरे तीनो बच्चे मेरी आँखें हैं, जिनसे मैं अपने आगे का रास्ता देखती हूँ।” यह केवल एक माँ के शब्द नहीं, बल्कि उस गहरे भाव का परिचय है जिसमें माँ अपने बच्चों में ही अपना भविष्य, अपनी उम्मीद और अपनी दुनिया देखती है। उनके लिए सफलता का अर्थ केवल आगे बढ़ना नहीं, बल्कि बच्चों को अच्छे संस्कार और बेहतर जीवन देना भी है।

उन्होंने अपने जीवन में कई चुनौतियों का सामना किया, लेकिन कभी हार नहीं मानी। कई बार परिस्थितियाँ कठिन हुईं, समय कम पड़ा, जिम्मेदारियाँ बढ़ीं, फिर भी उन्होंने मुस्कुराकर हर चुनौती को स्वीकार किया। यही कारण है कि आज एक सफल ब्यूटीशियन ही नहीं, बल्कि अनेक महिलाओं के लिए आत्मविश्वास और संघर्ष की जीवंत मिसाल बन चुकी हैं।

रश्मि की कहानी यह संदेश देती है कि माँ केवल घर संभालने वाली महिला नहीं होती, बल्कि वह परिवार की सबसे बड़ी शक्ति होती है। वह बच्चों के सपनों को उड़ान देने के साथ-साथ अपने सपनों को भी नई दिशा दे सकती है। जरूरत केवल आत्मविश्वास, मेहनत और परिवार के प्रति समर्पण की होती है।

मदर्स डे पर ऐसी सभी माताओं को सलाम, जो अपने संघर्षों को मुस्कान में छिपाकर परिवार को खुशियाँ देती हैं। रश्मि हरिहारनो जैसी महिलाएँ समाज को यह सिखाती हैं कि एक माँ जब ठान ले, तो वह अपने प्यार, त्याग और मेहनत से हर मुश्किल को आसान बना सकती है। सच ही कहा गया है माँ केवल जन्म नहीं देती, वह हर दिन अपने परिवार के लिए एक नया जीवन गढ़ती है।

Share

अन्य समाचार

c6339889-d8f9-4d4c-ba92-05c040e0d987

युवाओं के लिए तकनीकी शिक्षा का अवसर, शासकीय पॉलिटेक्निक राजनांदगांव में प्रवेश प्रक्रिया 11 से 15 जून तक

विदित हो कि संस्था में मॉडर्न ऑफिस मैनेजमेंट, कॉस्ट्यूम डिजाइनिंग एंट्रेंस मेकिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं टेलीकम्युनिकेशन, कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग एवं इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी जैसी रोजगार उन्मुख तीन वर्षीय डिप्लोमा पाठ्यक्रम संचालित है ।


Read More...
1781012144-f46491b9e5ec978269fd

सीएम हेल्पलाइन 1076 का शुभारंभ : 42 विभागों के 8 हजार अधिकारी 1195 श्रेणियों में शिकायतों का करेंगे समयबद्ध निराकरण

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार का स्पष्ट संकल्प है कि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक की समस्या सुनी जाए, उसका समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए तथा शासन-प्रशासन को और अधिक जवाबदेह बनाया जाए।


Read More...
img-20260610-wa0001

पर्यावरण संरक्षण के लिए जन्मदिन पर जंगल में 250 देसी आम के बीज फेंके

जंगल में प्राकृतिक फल वाले पेड़ कम होते जा रहे हैं। ऐसे में गुठली रोपण से 5-7 साल में फलदार वृक्षों से भर जाएगा। इससे पशु -पक्षियों को भोजन के लिए गांवों की ओर नहीं भटकना पड़ेगा।


Read More...
img-20260609-065707

राष्ट्रपति भवन से जंगलों तक गूंजी वीरता की गाथा, छत्तीसगढ़ के जांबाज अफसरों ने रचा शौर्य का नया इतिहास

राष्ट्रपति भवन में मिला यह शौर्य चक्र केवल दो अफसरों की बहादुरी का सम्मान नहीं है। यह उन अनगिनत जवानों के त्याग, साहस और समर्पण को नमन है, जो हर दिन देश की सुरक्षा के लिए अपने परिवारों से दूर रहकर चुनौतियों का सामना करते हैं।


Read More...
20260608-191004

दृढ़ इच्छाशक्ति और समाजसेवा का भाव किसी भी महिला को नेतृत्व की ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है...श्रीमती हेमा देशमुख की प्रेरक यात्रा

आज लगभग 25 वर्षों से राजनीति में सक्रिय रहते हुए श्रीमती हेमा देशमुख वर्तमान में महिला कांग्रेस छत्तीसगढ़ की प्रदेश उपाध्यक्ष के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रही हैं।


Read More...
img-20260603-wa0015

दूरदर्शन केंद्र में हुए संवाद कार्यक्रम...मुख्यमंत्री ने की ड्रोन दीदी शांति विश्वकर्मा की सराहना

कार्यक्रम में ड्रोन दीदियों की उपलब्धियों ने यह संदेश दिया कि अवसर और संकल्प मिलने पर ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं भी नवाचार और नेतृत्व के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू सकती हैं।


Read More...
c4184689-aa86-485c-862a-8c0d5d53e67a

पद्म पुरस्कार की राह पर जनजातीय प्रतिभाएं: सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 5 जून तक आमंत्रित किए जा रहे नामांकन

सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में जनजातीय समुदाय के उन योग्य और प्रेरणादायक व्यक्तियों की पहचान एवं नामांकन की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है, जो पद्म पुरस्कारों के लिए पात्र हैं।


Read More...
fb-img-1780194015655

विशेष शिक्षा के क्षेत्र में सुनहरा अवसर: समेकित क्षेत्रीय केंद्र (सी.आर.सी) ठाकुरटोला में प्रवेश प्रारंभ

समेकित क्षेत्रीय केंद्र ठाकुरटोला, राजनांदगांव में पुनर्वास परिषद इंडिया (आर.सी.आई.), नई दिल्ली से मान्यता प्राप्त दो वर्षीय पूर्णकालिक डिप्लोमा इन एजुकेशन स्पेशल एजुकेशन (आई.डी.डी.) पाठ्यक्रम संचालित किया जा रहा है। यह पाठ्यक्रम बौद्धिक एवं विकासात्मक विकलांगता के क्षेत्र में विशेषज्ञता प्रदान करता है तथा विद्यार्थियों को व्यावसायिक रूप से सशक्त बनाता है।


Read More...
img-20260523-wa0025-1

विशेष बच्चों के लिए धमतरी में लगा स्पीच एवं स्पेशल एजुकेशन वर्कशॉप

वर्कशॉप में राजनांदगांव की प्रसिद्ध स्पीच थैरेपी विशेषज्ञ रजनी राठी ने अपनी महत्वपूर्ण सेवाएं प्रदान कीं। उन्होंने बच्चों की समस्याओं का परीक्षण कर अभिभावकों को आवश्यक परामर्श दिया। साथ ही बच्चों के व्यवहार, भाषा विकास और संचार क्षमता को बेहतर बनाने के लिए कई उपयोगी सुझाव भी साझा किए।


Read More...
img-20260511-wa0004

‘प्लास्टिक के जाल’ में कैद होती ग्रामीण संस्कृति, कला ने बयां किया दर्द

इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय के राजमहल परिसर के सामने जब लोगों की नजर बांस से बनी एक झोपड़ी पर पड़ी, जो काली पन्नियों और प्लास्टिक में जकड़ी हुई थी, तो हर कोई कुछ पल के लिए ठहर गया। यह सिर्फ एक कला प्रदर्शनी नहीं थी, बल्कि ग्रामीण संस्कृति की पीड़ा, संघर्ष और उम्मीद का जीवंत चित्रण था।


Read More...