- Post by Admin on Saturday, Oct 10, 2026
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रजनी जोशी। अक्सर गांवों में विकास की बात आते ही नजरें सरकारी फाइलों और बजट की ओर उठ जाती हैं। लेकिन महासमुंद जिले का ग्राम लाफिन कला इस सोच को बदल रहा है। यहां के ग्रामीणों ने तय कर लिया कि इंतजार में वक्त गंवाने से बेहतर है कि खुद कमर कसी जाए। उनका ध्येय वाक्य है, 'अपना काम खुद कर लो', और इसी मंत्र के सहारे आज यह गांव पूरे इलाके के लिए प्रेरणा बन गया है।
शिकवा-शिकायत छोड़ी, जिम्मेदारी खुद उठाई; करीब 1200 की आबादी वाले इस गांव के लोगों का कहना है कि समस्याओं के समाधान के लिए शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से गिला-शिकवा करने और इंतजार करने में समय बीत जाता है। इसलिए ग्रामीणों ने मिलकर गांव के विकास की बागडोर अपने हाथ में ले ली। जनसहयोग और ग्राम फंड के दम पर यहां अब तक कई छोटे-बड़े काम पूरे हो चुके हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, मंदिर, सड़क और अन्य निर्माण मिलाकर करीब 50 लाख रुपए के कार्य गांव ने अपने बूते कराए हैं।
कीचड़ से मुक्ति: 40 हजार वर्गफीट का कांक्रीट गौठान :गांव का सबसे बड़ा प्रयास गौठान का कांक्रीटीकरण है। करीब 40 हजार वर्गफीट के इस गौठान में से लगभग 18 हजार वर्गफीट का काम पूरा हो चुका है, बाकी हिस्से में तेजी से काम चल रहा है। इसके पीछे की वजह बेहद व्यावहारिक है। ग्रामीण बताते हैं कि बारिश में गौठान कीचड़ से भर जाता था।
मवेशियों को बैठने की जगह नहीं मिलती थी, और गोबर भी कीचड़ में मिलकर बर्बाद हो जाता था। अब कांक्रीट का फर्श बनने से पशुओं को साफ-सुथरी और सूखी जगह मिलेगी, साथ ही गोबर एकत्र करने के लिए एक बड़ा मैदान भी उपलब्ध होगा। तालाब के बीच आस्था का आकर्षक केंद्र: लाफिन कला की पहचान सिर्फ गौठान तक सीमित नहीं है।
चौक भाटा के तालाब के बीच करीब 25 लाख रुपए की लागत से एक आकर्षक मंदिर का निर्माण भी ग्रामीणों के सहयोग से हो रहा है। इसके अलावा आने-जाने की परेशानी दूर करने के लिए कच्ची सड़कों का मुरमीकरण और कांक्रीट सड़क जैसे काम भी गांव ने खुद करवाए हैं। संदेश साफ: सहयोग हो तो कुछ भी असंभव नहीं ग्रामीणों का संदेश बिल्कुल सीधा है: गांव की जरूरतों के लिए केवल सरकारी योजनाओं के भरोसे बैठे रहना जरूरी नहीं, सामाजिक सहयोग से भी विकास की इबारत लिखी जा सकती है।
कलेक्टर ने भी की सराहना : इस पहल की प्रशंसा अब प्रशासन तक पहुंच चुकी है। महासमुंद कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने कहा कि जनभागीदारी से गांव की जरूरतें पूरी करने का लाफिन कला का तरीका सराहनीय है, और अन्य ग्राम पंचायतों को भी इससे प्रेरणा लेनी चाहिए।
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