रायपुर। जिन गांवों में आज भी डॉक्टर तक पहुंचने के लिए घंटों का सफर करना पड़ता है, वहीं के बच्चे अब डॉक्टर बनने जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के 11 छात्रों ने NEET काउंसलिंग के पहले ही दौर में सीट पक्की कर ली है। इनमें 9 को MBBS और 2 को BDS में दाखिला मिला है। ये सभी बच्चे 'छू लो आसमान' कार्यक्रम से पढ़े हैं। यह आवासीय कोचिंग योजना खनन कंपनी NMDC और दंतेवाड़ा जिला प्रशासन मिलकर चलाते हैं। इसी कार्यक्रम के दो और छात्रों ने JEE पास किया है। वे रायपुर के NIT में बायोटेक्नोलॉजी और माइनिंग में बीटेक करेंगे।

गांव की बेटी बनेगी गांव की डॉक्टर सफल छात्रों में ज्यादातर नक्सल हिंसा से प्रभावित दूर-दराज के आदिवासी इलाकों के हैं और अपने परिवार की पहली पीढ़ी हैं जो पढ़ाई कर रही है। किसी के माता-पिता छोटी खेती करते हैं, तो किसी के दिहाड़ी मजदूर हैं। मेडिकल सीट पाने वालों में एक सामान्य वर्ग के छात्र को छोड़कर बाकी सभी अनुसूचित जनजाति (ST) के हैं।

पोटाली गांव की 21 वर्षीय दीपा मरकाम ने NEET में 412 अंक लाकर MBBS की सीट पाई है। दीपा को अपने गांव की मुश्किलें अच्छी तरह याद हैं। वे बताती हैं कि गांव वालों को डॉक्टर को दिखाने के लिए कई घंटे यात्रा करनी पड़ती थी। उनका सपना है कि पढ़ाई पूरी करके वे गांव लौटें और अपने लोगों की सेहत की जिम्मेदारी संभालें।

2011 से जगा रही है उम्मीद 'छू लो आसमान' योजना 2011 में शुरू हुई थी। कक्षा 8 के बाद पूरे जिले में प्रवेश परीक्षा होती है और होनहार बच्चों को चुना जाता है। चुने गए बच्चों को कक्षा 9 से 12 तक मुफ्त रहना, खाना, यूनिफॉर्म, किताबें और कोचिंग मिलती है। कार्यक्रम की प्रधानाध्यापिका शैनी रविंद्र के मुताबिक इस साल 22 छात्रों ने NEET पास किया है। अब तक 13 छात्रों का काउंसलिंग परिणाम आया है। आगे के दौरों में और बच्चों को दाखिला मिलने की उम्मीद है।

NMDC प्रमुख ने दी बधाई NMDC के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक अमितवा मुखर्जी ने छात्रों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इन बच्चों की सफलता बताती है कि लगातार मौके मिलें तो युवा गरीबी और पिछड़ेपन की बड़ी दीवारें भी पार कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि ये छात्र बदलाव की मिसाल बनकर अपने परिवार को आगे बढ़ाएंगे और अपने क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर बदलेंगे।

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