कमलेश यादव : बालोद जिला मुख्यालय से करीब 45 किलोमीटर की दूरी पर, धान के लहलहाते खेतों और कच्ची पगडंडियों के बीच बसा है एक छोटा-सा गांव माहुद, जिसकी आबादी लगभग 2000 है। यहां की सबसे खास बात यह है कि गांव की कोई भी समस्या हो, लोग उसे अकेले नहीं बल्कि मिल-जुलकर सुलझाते हैं,मानो पूरा गांव एक परिवार हो। न आधुनिक सुविधाएं, फिर भी इस मिट्टी ने कुछ ऐसा रच दिया, जिसकी गूंज पूरे जिले में सुनाई देती है।

कहते हैं कि हर गांव की अपनी एक पहचान होती है, कोई नदी से जाना जाता है तो कोई मेले से लेकिन माहुद की पहचान बन गया एक इंसान, जिसने अपनी सेवा को कभी रुतबे का प्रतीक नहीं, बल्कि सेवा का पर्याय माना। यह कहानी है डॉक्टर वासुदेव साहू की, जिन्होंने साबित किया कि इंसानियत की सबसे बड़ी डिग्री किसी किताब में नहीं, बल्कि दिल में लिखी होती है।

गौरतलब है कि, चिकित्सा की पढ़ाई पूरी करके डॉ. साहू ने दो दशक पहले माहुद में अपनी प्रैक्टिस शुरू की थी। उन्होंने चिकित्सा को केवल पेशा नहीं बल्कि सेवा धर्म के रूप में अपनाया। उनके लिए इलाज का मतलब केवल दवाई देना नहीं, बल्कि मरीज के दुख में साझीदार बनना रहा है। यह सेवा भावना उनके परिवार में भी झलकती है, उनके दोनों बच्चे आज MBBS की डिग्री लेकर चिकित्सा के क्षेत्र में उनकी विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।

डॉ. वासुदेव साहू कहते है कि, गांव ने मुझे जितना दिया है, मैं जिंदगी भर भी उसका कर्ज नहीं चुका सकता इसलिए यह मेरा फर्ज है कि जब तक शरीर साथ दे, तब तक सेवा करता रहूं। और यह सिर्फ मेरी बात नहीं है, अंधविश्वास के अंधेरे को मिटाना और हर बच्चे को एक सुरक्षित बचपन देना यही असली विकास है। मुझे उम्मीद है कि आने वाली पीढ़ी इसे सिर्फ एक कहानी की तरह नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी की तरह आगे बढ़ाएगी।"

25 साल के इस सफर में न जाने कितने चेहरे बदले, कितनी पीढ़ियां गुजरीं, लेकिन डॉ. साहू का दरवाजा और उनका धैर्य वैसा ही बना रहा। गांव वाले कहते हैं कि आधी रात को भी अगर किसी मरीज की तबीयत बिगड़े, तो डॉक्टर साहब सहायता के लिए ततपर रहते हैं मानो सेवा के लिए घड़ी और थकान के मायने ही उनके लिए खत्म हो गए हों।

डॉ. साहू की सेवा भावना केवल दवाई और इलाज तक सीमित नहीं रही। जब भी किसी कुपोषित बच्चे की खबर उन तक पहुंची, वे बिना देर किए उसकी जिम्मेदारी उठाने को तैयार हो जाते। ऐसे कई बच्चों को उन्होंने गोद लिया और उन्हें एक नई जिंदगी दी। गांव के लोग बताते हैं कि जरूरतमंदों की मदद के लिए उनका दरवाजा हमेशा खुला रहता था।

सामाजिक सरोकार की इस यात्रा में एक और अनोखा अध्याय जुड़ा, जब डॉ. साहू ने उन जोड़ों का हाथ थामा जिनके पास शादी के लिए संसाधन नहीं थे। अब तक वे 15 जोड़ों का विवाह करवा चुके हैं, हर विवाह के पीछे किसी गरीब परिवार की बेटी या असहाय जोड़े की कहानी छिपी है। लेकिन डॉ. साहू की सबसे बड़ी लड़ाई अंधविश्वास के खिलाफ रही। उन्होंने महसूस किया कि गांवों में बीमारी से ज्यादा खतरनाक कभी-कभी अंधविश्वास होता है, जो लोगों को सही इलाज से दूर रखता है। इसी सोच के साथ उन्होंने करीब 15 गांवों में अंधश्रद्धा उन्मूलन के लिए जागरूकता अभियान चलाया।

उनके इस प्रयास की गूंज इतनी दूर तक पहुंची कि वर्ष 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने स्वयं उन्हें सम्मानित किया। आज डॉ. वासुदेव साहू की कहानी सिर्फ एक डॉक्टर की कहानी नहीं, बल्कि एक ऐसे इंसान की गाथा है, जिसने साबित किया कि सच्ची सेवा किसी बड़े शहर या बड़े अस्पताल की मोहताज नहीं होती। माहुद जैसे छोटे से गांव से निकलकर उन्होंने जो मिसाल कायम की, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।

Share

अन्य समाचार

f8dc11dc-a2ed-4c6d-a668-f7081d6952fd

शिक्षा वह दीया है, जो हर अंधेरे युग में रास्ता दिखाता है

इतिहास गवाह है कि हर बड़ी क्रांति के पीछे एक विचार था, और हर विचार के पीछे एक शिक्षक। जब समाज अंधविश्वास और अज्ञान के अंधेरे में डूबा था, तब शिक्षा ने ही दीये की तरह रास्ता दिखाया।


Read More...
img-20260904-075023

जब एक महिला की ज़िद ने बचा ली एक पूरी प्रजाति: कैसे 10,000 महिलाओं की फ़ौज ने सारस को नया जीवन दिया

डॉ. पूर्णिमा देवी बर्मन की कहानी सिर्फ़ एक पक्षी को बचाने की कहानी नहीं है यह इस बात का प्रमाण है कि जब महिलाएं एकजुट होकर ठान लें, तो बड़े से बड़ा बदलाव भी संभव है। उन्होंने साबित कर दिया कि संरक्षण और सशक्तीकरण साथ-साथ चल सकते हैं, और एक व्यक्ति का संकल्प पूरे समुदाय की सोच बदल सकता है।


Read More...
img-20260902-073745

जीवन में आए सबसे कठिन मोड़ के बाद नए सिरे से खुद को गढ़ने की मिसाल: कैंसर को हराकर 57 वर्षीय जावित्री ने कैसे बनाई नई पहचान

57 वर्ष की आयु में जावित्री की यह कहानी केवल पावरलिफ्टिंग की उपलब्धि भर नहीं है, बल्कि यह जीवन में आए सबसे कठिन मोड़ के बाद नए सिरे से खुद को गढ़ने की मिसाल है।


Read More...
img-20260901-071319

तीन फुट का हौसला, आसमान जैसी उड़ान: डॉ. गणेश बरैया की प्रेरक कहानी

आज हर सुबह जब गणेश स्टेथोस्कोप गले में डालकर अस्पताल के गलियारे में कदम रखते हैं, तो वह सिर्फ एक डॉक्टर की ड्यूटी नहीं, बल्कि यह संदेश भी साथ लेकर चलते हैं कि हौसला शरीर की ऊंचाई का मोहताज नहीं होता।


Read More...
img-20260823-wa0025

जिद्द जिजीविषा और परिवार का सपना: डॉक्टर हेमंत साहू ने एक लक्ष्य तय किया, उसे पाने में पूरी शिद्दत से जुट गए, और आज परिणाम सबके सामने है

जो परिवार ने देखा था, वह साकार हुआ है और असल में यह सफलता किसी एक की नहीं, हम सबकी है।" डॉक्टर हेमंत साहू के यह शब्द किसी भी संघर्षरत इंसान के लिए एक मशाल की तरह हैं।


Read More...
fb-img-1787118539319

विश्व फोटोग्राफी दिवस : एक कैमरामैन दुनिया को अलग तरह से देखता है

हर साल 19 अगस्त को पूरी दुनिया में विश्व फोटोग्राफी दिवस मनाया जाता है। यह दिन उन सभी फोटोग्राफरों और शौकीनों को समर्पित है, जिन्होंने अपने कैमरे के जरिए समय के उन खास पलों को कैद किया जो हमेशा-हमेशा के लिए यादगार बन गए।


Read More...
433ee9b8-16a2-44cc-8b49-1c4840991d09

आजादी के 80 साल: बदलाव की नई इबारत लिख रहा बैगाटोला

आजादी के 80वें वर्ष में जब पूरा देश तिरंगे के रंग में रंगने की तैयारी कर रहा है, बैगाटोला जैसे गांव यह साबित कर रहे हैं कि असली विकास तभी सार्थक है जब वह गांव-गांव, गली-गली तक पहुंचे।


Read More...
26689374-8e77-4b93-8488-a12843e1188c

हाथ में स्टेथोस्कोप, दिल में इंसानियत और आंखों में हर जिंदगी बचाने का सपना...डॉक्टर विजय ठाकुर की प्रेरक कहानी

तुलसी क्लिनिक से हजारों जिंदगी में भरोसा, करुणा और उम्मीद जगाने वाले चिकित्सक डॉक्टर विजय ठाकुर


Read More...
sdm-karishma-chauhan-success-story

AI से लिखवाए निबंध,नोएडा की करिश्मा ऐसे UP PCS क्रैक कर बनी थीं SDM

UP PCS Topper Karishma Chauhan Success Story: क्या AI से तैयारी करके सिविल सेवा जैसी परीक्षा पास की जा सकती है? नोएडा की करिश्मा चौहान की सफलता ने इस सवाल का जवाब 'हां' में दिया है। उनकी सफलता की कहानी तैयारी के पुराने तरीके से हटकर 'स्मार्ट-स्टडी' और खुद पर अटूट विश्वास की है।


Read More...
img-20260714-wa0025

एक आंख की रोशनी गई, मगर हजारों जीवन में उम्मीद की रोशनी जगा दी...अपनी पीड़ा को समाज की सेवा में बदलने वाले, डॉक्टर सुदर्शन देवांगन

डॉ. एस.के. (सुदर्शन) देवांगन डॉ. भीमराव अंबेडकर के उस विचार को अपने जीवन में साकार कर रहे हैं, जिसमें उन्होंने कहा था कि "जब पढ़-लिखकर काबिल बन जाओ, तब उस समाज को मत भूलना, जहां से तुम आए हो।" पिछले 12 वर्षों से वे रातापयली और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के जरूरतमंद मरीजों का निःशुल्क इलाज कर रहे हैं।


Read More...