- Post by Admin on Wednesday, Jun 03, 2026
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कारवी यादव : जशपुर की वादियों में बहती ठंडी हवाएँ, हरियाली से ढकी पहाड़ियाँ और प्रकृति का अनमोल आशीर्वाद आज किसानों की नई उम्मीद बन रहा है। कभी पारंपरिक खेती तक सीमित रहने वाले किसान अब काजू की खेती से अपनी आय बढ़ाकर आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रहे हैं। जशपुर की मिट्टी और मौसम ने साबित कर दिया है कि जब प्रकृति साथ देती है और किसान मेहनत करता है, तो खेत केवल फसल ही नहीं, बल्कि समृद्धि और खुशहाली भी उगाते हैं।
गौरतलब है कि, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जशपुर जिला खेती और बागवानी के क्षेत्र में लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। पारंपरिक खेती के साथ अब किसान नगदी और फल फसलों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। सेब, नाशपाती, स्ट्रॉबेरी और काजू जैसी फसलें ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रही हैं। खासकर काजू उत्पादन किसानों के लिए भरोसेमंद आय का बड़ा जरिया बनकर उभरा है।
जिला प्रशासन, उद्यान विभाग, रीड्स और नाबार्ड के संयुक्त प्रयासों से जिले में काजू उत्पादन का दायरा तेजी से बढ़ा है। वर्तमान में जशपुर के करीब 7800 किसान लगभग 7800 एकड़ भूमि पर काजू की खेती कर रहे हैं। अधिकांश किसान एक-एक एकड़ में काजू की खेती कर नियमित आय अर्जित कर रहे हैं। इससे न सिर्फ उनकी आमदनी बढ़ी है बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आत्मनिर्भरता के नए अवसर भी बने हैं।
जशपुर काजू की बढ़ी मांग, देशभर में बनी पहचान: जशपुर में उत्पादित काजू अपनी मिठास, गुणवत्ता और बेहतरीन स्वाद के कारण खास पहचान बना चुका है। छत्तीसगढ़ के साथ-साथ झारखंड, ओडिशा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली जैसे राज्यों में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। व्यापारियों और उपभोक्ताओं के बीच जशपुर काजू तेजी से लोकप्रिय हो रहा है और बाजार में इसकी अलग पहचान बन चुकी है।
काजू बना लाभदायक नगदी फसल, किसानों को मिल रहा बेहतर उत्पादन: कृषि विशेषज्ञों के अनुसार ग्राफ्टेड पौधों से जल्दी फल प्राप्त होते हैं और उत्पादन भी अधिक मिलता है। वर्षा ऋतु में पौध रोपण सबसे उपयुक्त, पौधों के बीच 7 से 8 मीटर दूरी, गोबर खाद और मिट्टी का मिश्रण उपयोग, 3 से 4 वर्ष में फल उत्पादन शुरू, 8 से 10 वर्षों में पूर्ण उत्पादन। एक विकसित पेड़ से औसतन 8 से 15 किलोग्राम तक काजू प्राप्त किया जा सकता है।
किसानों की आय में बढ़ोतरी, काजू से मिल रहे अतिरिक्त लाभ: काजू का उपयोग मिठाई, नमकीन और ड्राई फ्रूट के रूप में बड़े पैमाने पर किया जाता है। इसके साथ ही काजू के छिलकों से औद्योगिक तेल भी तैयार होता है, जिससे किसानों को अतिरिक्त आय मिल रही है। काजू के व्यापार और बढ़ते निर्यात से किसानों की आर्थिक स्थिति लगातार मजबूत हो रही है। जशपुर में काजू उत्पादन की यह सफलता किसानों की मेहनत, आधुनिक खेती तकनीकों और शासन की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का परिणाम है। फल और नगदी फसलों की बढ़ती खेती ने किसानों के जीवन में समृद्धि लाई है और जशपुर को कृषि एवं बागवानी के क्षेत्र में नई पहचान दिलाई है।
किसानों को सब्सिडी से मिल रहा लाभ: जशपुर जिले में काजू बागवानी को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से अलग-अलग योजनाओं के तहत किसानों को सब्सिडी दी जा रही है। मुख्य रूप से मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH) और राज्य उद्यानिकी विभाग की योजनाओं के तहत किसानों को पौधरोपण, पौध सामग्री, बाग स्थापना और माइक्रो इरिगेशन जैसी सुविधाओं पर लगभग 50% से 75% तक की आर्थिक सहायता मिलती है। आदिवासी और वन क्षेत्रों में यह सहायता अनुपात और अधिक हो जाता है, जिससे किसानों पर शुरुआती लागत का बोझ काफी कम हो जाता है। इसके अलावा प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत ड्रिप और स्प्रिंकलर सिस्टम लगाने पर भी 55% से 70% तक सब्सिडी दी जाती है। वहीं नाबार्ड के सहयोग से बागवानी क्लस्टर और प्रोजेक्ट आधारित विकास में भी वित्तीय सहायता मिलती है। इस तरह सरकार की विभिन्न योजनाओं के जरिए किसानों को काजू बागवानी में मजबूत सपोर्ट मिल रहा है, जिससे वे कम लागत में उत्पादन शुरू कर बेहतर आय अर्जित कर रहे हैं।
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