2019 में सत्यदर्शन लाइव के द्वारा बनाई गई प्रेरक स्टोरी को आज फिर से अपडेट किया जा रहा है।समय बदला, परिस्थितियाँ बदलीं, लेकिन सेवा और समर्पण की भावना आज भी वैसी ही अडिग है।यह कहानी है ऐसे युवा की, जिसने बिना किसी प्रचार और दिखावे के हजारों लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का कार्य किया है।

 

कमलेश यादव : आज के दौर में जहाँ अधिकांश लोग सोशल मीडिया की चमक-दमक और दिखावे में व्यस्त हैं, वहीं सुमित गुप्ता जैसे लोग समाज के लिए एक जीवंत प्रेरणा बनकर सामने आते हैं। सेवा, समर्पण और नया सृजन को अपने जीवन का उद्देश्य मानने वाले सुमित पिछले लगभग 10 वर्षों से निःस्वार्थ भाव से समाजहित के कार्यों में जुटे हुए हैं। उनकी सोच केवल मदद तक सीमित नहीं है, बल्कि वे समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के उद्देश्य से लगातार कार्य कर रहे हैं।

कहते हैं कि “एक पेन और एक व्यक्ति पूरी दुनिया बदल सकता है”, और यह पंक्ति सुमित गुप्ता पर बिल्कुल सटीक बैठती है। अब तक वे हजारों लोगों को निःशुल्क श्रीमद्भगवत गीता वितरित कर चुके हैं। उनका मानना है कि यदि समाज में संस्कार और आध्यात्मिक चेतना मजबूत होगी, तो आने वाली पीढ़ियाँ बेहतर दिशा में आगे बढ़ेंगी। यही कारण है कि वे धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों को जन-जन तक पहुँचाने का कार्य निरंतर कर रहे हैं।

सुमित गुप्ता केवल धार्मिक पुस्तकों के वितरण तक सीमित नहीं हैं। समाज की आवश्यकता को समझते हुए उन्होंने कई मंदिरों के पुनर्निर्माण में सहयोग दिया है। वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले जरूरतमंद लोगों तक कपड़े, चप्पल और अन्य बुनियादी सामग्री पहुँचाने का कार्य भी वे निरंतर करते आ रहे हैं। कठिन परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के बावजूद उनका सेवा कार्य कभी नहीं रुका।

उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे अपने कार्यों का प्रचार-प्रसार करने में विश्वास नहीं रखते। आज की “रील लाइफ” वाली दुनिया में सुमित वास्तव में एक “रियल हीरो” के रूप में सामने आते हैं। उनके चेहरे पर सादगी, व्यवहार में विनम्रता और कार्यों में ईमानदारी साफ दिखाई देती है। समाज सेवा उनके लिए कोई दिखावा नहीं, बल्कि आत्मसंतोष और मानवता का माध्यम है।

समाजहित के इन कार्यों के दौरान उन्हें कई बार असामाजिक तत्वों की धमकियों और विरोध का भी सामना करना पड़ा। कई परिस्थितियाँ ऐसी आईं जब आम व्यक्ति शायद पीछे हट जाता, लेकिन सुमित गुप्ता ने कभी हार नहीं मानी। उनका मानना है कि यदि उद्देश्य सच्चा हो और मन में सेवा का भाव हो, तो हर कठिनाई छोटी लगने लगती है। यही जज्बा उन्हें लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

आज समाज को सुमित गुप्ता जैसे युवाओं की आवश्यकता है, जो बिना किसी स्वार्थ के समाज और संस्कृति के लिए कार्य कर रहे हैं। उनका जीवन यह संदेश देता है कि बदलाव केवल बड़े मंचों से नहीं, बल्कि छोटे-छोटे निःस्वार्थ प्रयासों से भी लाया जा सकता है। सेवा और समर्पण की यह यात्रा आने वाली पीढ़ियों के लिए निश्चित रूप से प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।

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