- Post by Admin on Tuesday, Dec 09, 2025
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सत्यदर्शन लाइव डेस्क, गोविंद साव : कभी जिस नाले के पास से लोग नाक पर रूमाल रखकर गुज़रते थे, आज वही रास्ता बेंगलुरु की नई उम्मीद बन चुका है। गंदगी, बदबू और अनदेखी के अंधेरे से निकलकर K100 जलमार्ग ने यह साबित कर दिया कि जब लोग अपने शहर को बदलने का संकल्प लेते हैं तो कितनी भी दबी हुई धड़कनें फिर से जीवित की जा सकती हैं। यह सिर्फ एक नाले का पुनरुद्धार नहीं, बल्कि एक पूरे मोहल्ले के आत्मविश्वास, साहस और सामूहिक जिम्मेदारी का पुनर्जन्म है।
500 साल पुरानी विरासत का पुनर्जागरण : बेंगलुरु का K100 कोई साधारण नाला नहीं था। यह शहर के 500 साल पुराने राजकालुवे सिस्टम का हिस्सा है, जिसे केम्पेगौड़ा ने शहर के तालाबों और जलस्रोतों को जोड़ने के लिए बनाया था। लेकिन तेज़ी से बढ़ते शहरीकरण ने इसकी तस्वीर बदल दी।नाले पर अतिक्रमण बढ़े, कंक्रीट की दीवारों ने इसकी सांसें रोक दीं, और यह खुला नाला सीवेज व कचरे का अड्डा बन गया। नतीजा प्रतिदिन 130 मिलियन लीटर अपशिष्ट जल, मच्छरों का आतंक और बीमारियों का खतरा।
जब बदलाव की शुरुआत हुई बड़े पैमाने पर पुनरुत्थान: बहुत वर्षों की प्रतीक्षा के बाद वह दिन आया, जब सरकार, नागरिक संस्थाओं और MOD फाउंडेशन ने मिलकर K100 की नियति बदलने का फैसला किया। पुनरुद्धार के तहत, गाद निकासी हुई, सीवेज का प्रवाह 130 MLD से घटकर केवल 5 MLD रह गया, पैदल पथ, हरित क्षेत्र और पार्क विकसित किए गए, पुराने पुलों का सुधार किया गया, और पूरे 11 किलोमीटर के मार्ग को एक सुंदर, सुरक्षित व जीवंत सार्वजनिक स्थान में बदला गया।
बदबूदार नाला अब ‘ग्रीन कॉरिडोर’ : आज K100 सिर्फ जलमार्ग नहीं एक साझा पड़ोस की धड़कन है। बच्चे इसके किनारों पर खेलते हैं, निवासी स्वच्छता का ध्यान रखते हैं, कभी मच्छरों से भरे क्षेत्र में अब चिड़ियों की चहचहाहट सुनाई देती है, और यह इलाकों को बाढ़ से सुरक्षित भी करता है। जहाँ कभी लोग नज़रें चुराकर निकलते थे, वहीं आज वे गर्व से रुककर इस परिवर्तन को निहारते हैं।
एक सीख भूले हुए जलमार्ग फिर बन सकते हैं जीवनरेखा: K100 यह संदेश देता है कि जब विरासत, योजना और सामुदायिक प्रयास एक साथ आते हैं, तो शहर सिर्फ सुंदर नहीं बनता जीवंत बनता है। यह सफलता बेंगलुरु के बाकी 842 किलोमीटर राजकालुवों के लिए भी एक प्रेरणादायक खाका प्रस्तुत करती है। K100 की यह यात्रा हमें बताती है जहाँ लोग मिलकर अपने शहर को नया जीवन देने की ठान लें, वहाँ किसी भी भूले-बिसरे कोने से हरियाली और उम्मीद फिर खिल सकती है।
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